सीतामढ़ी। मिथिला की पावन धरती और माँ जानकी की प्राकट्य स्थली सीतामढ़ी इस वर्ष एक ऐतिहासिक उत्सव का गवाह बनने जा रही है। आगामी 25 अप्रैल को ‘जानकी नवमी’ के पावन अवसर पर मुख्य आयोजन स्थल पुनौरा धाम को भव्य रूप दिया जा रहा है। पूरे शहर को रोशनी और फूलों से सजाया जा रहा है, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो स्वयं देवलोक धरती पर उतर आया हो। स्थानीय प्रशासन और मंदिर न्यास समिति इस दिन को यादगार बनाने के लिए दिन-रात तैयारियों में जुटे हैं। जानकी नवमी का महत्व सीतामढ़ी के लिए दीपावली से भी बड़ा माना जाता है, क्योंकि यहीं से जगत जननी माँ सीता का प्राकट्य हुआ था।
18 अप्रैल से रामकथा का अमृत: जगद्गुरु रामभद्राचार्य का आगमन
इस वर्ष का उत्सव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि जानकी नवमी के उपलक्ष्य में प्रख्यात विद्वान और पद्म विभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज की दिव्य ‘रामकथा’ का आयोजन होने जा रहा है। यह कथा 18 अप्रैल से प्रारंभ होकर 25 अप्रैल तक चलेगी। सीतामढ़ी के इतिहास में यह एक बड़ा आध्यात्मिक समागम माना जा रहा है। जगद्गुरु के आगमन की खबर से न केवल सीतामढ़ी बल्कि पड़ोसी देश नेपाल और आसपास के जिलों के श्रद्धालुओं में भी भारी उत्साह है। भक्तों के लिए विशाल पंडाल और ठहरने की व्यवस्था की जा रही है ताकि वे आठ दिनों तक भक्ति की अविरल धारा में गोते लगा सकें।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला
जानकी नवमी के नौ दिवसीय उत्सव के दौरान केवल कथा ही नहीं, बल्कि विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी प्रस्तुति होगी। स्थानीय कलाकारों द्वारा मैथिली सोहर, झूमर और सीता जन्म के प्रसंगों पर आधारित नाटकों का मंचन किया जाएगा। मंदिर परिसर में अखंड कीर्तन और विशेष ‘महाआरती’ का आयोजन भी तय है। 25 अप्रैल की सुबह माँ जानकी का विशेष अभिषेक किया जाएगा और छप्पन भोग लगाकर महाप्रसाद का वितरण होगा। यह आयोजन न केवल धार्मिक है, बल्कि मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का एक सशक्त मंच भी बनता जा रहा है।
सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पुनौरा धाम और कथा स्थल के चारों ओर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जाएगी। यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए वाहनों के रूट बदले गए हैं और जगह-जगह स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी, मेडिकल कैंप और विश्राम गृहों की व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी ने स्वयं स्थलीय निरीक्षण कर निर्देश दिए हैं कि बाहर से आने वाले किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो, क्योंकि इस बार कथा और नवमी के संगम से भीड़ पिछले वर्षों के सारे रिकॉर्ड तोड़ सकती है।
सीतामढ़ी बनेगा विश्व पर्यटन का केंद्र
केंद्र और राज्य सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत सीतामढ़ी को रामायण सर्किट से जोड़कर विकसित किया जा रहा है। जानकी नवमी के इस भव्य आयोजन के माध्यम से सीतामढ़ी को वैश्विक पटल पर एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने का प्रयास है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जिस तरह अयोध्या में प्रभु राम के भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है, उसी तरह माँ जानकी की जन्मभूमि का यह विस्तार और उत्सव आने वाले समय में विश्वभर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करेगा। 25 अप्रैल को होने वाला यह भव्य समापन सीतामढ़ी के विकास और आस्था के नए अध्याय की शुरुआत करेगा।












