- डेस्क। सूर्य के मीन राशि से मेष राशि में प्रवेश करते ही 14 अप्रैल को खरमास का समापन हो गया है, जिसके साथ ही बिहार सहित संपूर्ण क्षेत्र में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर लगा एक माह का प्रतिबंध हट गया है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष अप्रैल से जुलाई के मध्य विवाह के कुल 36 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। खरमास खत्म होते ही जिले में शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगी है और व्यापारिक गतिविधियों में जबरदस्त उछाल आया है। स्थानीय मैरेज हॉल, कैटरिंग सेवा, बैंड-बाजा और पंडितों की बुकिंग लगभग फुल हो चुकी है, जिससे बाजार में भारी उत्साह का माहौल बना हुआ है।
ग्रह-नक्षत्रों का अनूठा संयोग और वैवाहिक मुहूर्त
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, इस साल रवि और गुरु का विशेष संयोग बन रहा है, जो नवदंपतियों के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। पंडितों का मत है कि सफल वैवाहिक जीवन के लिए सूर्य, गुरु और शुक्र की स्थिति का सशक्त होना अनिवार्य है, जहाँ गुरु सौभाग्य और शुक्र प्रेम का कारक है। विवाह के लिए रोहिणी, मृगशिरा और हस्त नक्षत्र को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। हालांकि, आचार्यों ने ‘तीन ज्येष्ठ’ के योग (वर, कन्या और मास तीनों का ज्येष्ठ होना) से बचने की सलाह दी है। इस सीजन में ग्रहों की अनुकूलता वैवाहिक आयोजनों की दिव्यता को और बढ़ा रही है।

अप्रैल से जून: लग्न की धूम और पंचांग का सटीक विवरण
आगामी तीन महीने विवाह आयोजनों के लिए सबसे व्यस्त रहने वाले हैं। अप्रैल के बचे हुए दिनों में 10 शुभ तिथियां हैं, जबकि मई और जून में भी 10-10 दिनों के विशेष मुहूर्त निकल रहे हैं। तिथियों को लेकर बनारसी और मिथिला पंचांग में आंशिक अंतर है। मिथिला पंचांग के अनुसार अप्रैल में 17, 20, 26 और 30 तारीखें शुभ हैं, तो वहीं बनारसी पंचांग में 15, 16, 20 और 21 अप्रैल को प्रमुख माना गया है। जून के उत्तरार्ध में 19 से 29 तारीख तक शादियों का अटूट सिलसिला चलेगा, जिसके कारण सड़कों पर बारातों की गहमागहमी और बाजारों में भारी भीड़ रहने की संभावना है।
जुलाई में चातुर्मास के साथ लगेगा आयोजनों पर विराम
विवाह का यह उत्सव जुलाई के मध्य तक अपने चरम पर रहेगा। जुलाई महीने में 1, 2, 6, 7, 8 और 12 तारीख को अंतिम दौर के शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। इसके पश्चात जुलाई के अंत में ‘चातुर्मास’ प्रारंभ हो जाएगा, जिससे देवशयन के कारण अगले चार महीनों तक विवाह और अन्य बड़े मांगलिक कार्यों पर पुनः विराम लग जाएगा। यही कारण है कि जिन परिवारों में विवाह तय हैं, वे जुलाई के दूसरे सप्ताह तक अपने सभी आयोजन संपन्न करने की तैयारियों में दिन-रात जुटे हुए हैं। इसके बाद शुभ कार्यों के लिए देवोत्थान एकादशी का इंतजार करना होगा।












