
सीतामढ़ी। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच कोटा के एक मेधावी छात्र ने प्रेरणादायक सफलता हासिल की है। छात्र सीतामढ़ी के रहने वाला कृष्णा आनंद ने बायोलॉजी विषय में 360 में से 360 का शत-प्रतिशत स्कोर हासिल कर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। अपनी इस शानदार सफलता का रहस्य साझा करते हुए छात्र ने बताया कि लगातार मेहनत, पढ़ाई में अनुशासन और सही प्राथमिकताओं को चुनना ही उनकी सफलता की मुख्य कुंजी रहा। कोटा जैसे प्रतिस्पर्धी माहौल में रहकर पढ़ाई के दौरान उन्होंने हर चुनौती का सामना किया और अपनी लगन से यह मुकाम हासिल किया।
सफलता की रणनीति पर चर्चा करते हुए छात्र कृष्णा ने बताया कि उन्होंने बायोलॉजी में बेहतर अंक पाने के लिए एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों पर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने एनसीईआरटी की हर एक पंक्ति का इतनी बार रिवीजन किया कि उन्हें पूरी किताब कंठस्थ हो गई थी। इसके साथ ही उन्होंने पिछले 10 से 12 वर्षों के प्रश्न-पत्रों PYQs को हल करने पर विशेष जोर दिया। छात्र का मानना है कि पिछले वर्षों के प्रश्नों को हल करने से परीक्षा पैटर्न की बेहतर समझ विकसित होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और उन मुख्य विषयों की पहचान होती है जिनसे परीक्षा में बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं।
फिजिक्स और केमिस्ट्री जैसे विषयों में भी उन्होंने समान रूप से संतुलन बनाए रखा। छात्र के अनुसार, इन दोनों विषयों में पकड़ मजबूत करने के लिए उन्होंने ज्यादा से ज्यादा न्यूमेरिकल्स हल किए और फॉर्मूलों का बार-बार रिवीजन किया। अपने दैनिक दिनचर्या और टाइम-टेबल के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि उनका कोई सख्त टाइम-टेबल नहीं था, बल्कि एक लचीला और लक्ष्य-आधारित यानि गोल-ओरिएंटेड शेड्यूल था। वे सुबह लगभग 7:30 बजे उठते थे और दोपहर की कोचिंग (2:00 से 8:30 बजे) से पहले और बाद में देर रात 1:00 से 2:00 बजे तक सेल्फ-स्टडी करते थे। पढ़ाई के बीच में छोटे-छोटे ब्रेक लेना भी उनकी रणनीति का अहम हिस्सा था।
डिजिटल दौर में जहां छात्र अपनी पढ़ाई और दिनचर्या के लिए काफी हद तक स्मार्टफोन पर निर्भर रहते हैं, वहीं इस छात्र ने एक अलग और साहसिक मार्ग चुना। कक्षा 11वीं के शुरुआती कुछ महीनों में स्मार्टफोन का उपयोग करने के बाद जब उन्हें लगा कि इससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है और ध्यान भटक रहा है, तो उन्होंने तुरंत स्मार्टफोन दूरी बना ली और उसकी जगह साधारण कीपैड फोन अपना लिया। छात्र का कहना है कि स्मार्टफोन से दूरी बनाने से उनके ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में काफी सुधार हुआ और वे अपनी पढ़ाई पर पूरी तरह से ध्यान दे पाए।
अपनी इस उपलब्धि में अपने परिवार, विशेषकर अपने बड़े भाई के योगदान को रेखांकित करते हुए छात्र काफी भावुक दिखे। परीक्षा से ठीक तीन महीने पहले उनके बड़े भाई उनके साथ कोटा में रहने आ गए थे। उन्होंने न केवल छात्र के खान-पान और दिनचर्या का ख्याल रखा, बल्कि पढ़ाई के माहौल को नियंत्रित किया और सेल्फ-स्टडी के घंटों को बढ़ाने में मार्गदर्शन किया। छात्र ने अपने संदेश में अन्य नीट अभ्यर्थियों को सलाह दी कि वे दिन में कितना समय बर्बाद हुआ, उसकी परवाह किए बिना अपने दैनिक गोल को पूरा करने पर ध्यान दें और निरंतरता बनाए रखें।







